शनिवार, 13 अगस्त 2011

पिता, पति पुत्र

अगर तुम्हारा जन्म नारी के रूप मे हुआ है तो
बचपन में तुम पर
शासन करेंगे पिता
अगर तुम अपना बचपन बिता चुकी हो
नारी के रूप में
तो जवानी में तुम पर
राज करेगा पति
अगर जवानी की दहलीज़
पार कर चुकी होगी
तो बुढ़ापे में
रहोगी पुत्र के अधीन


जीवन-भर तुम पर
राज कर रहे हैं ये पुरुष
अब तुम बनो मनुष्य
क्योंकि वह किसी की नहीं मानता अधीनता -
वह अपने जन्म से ही
करता है अर्जित स्वाधीनता

एहसान मंद हूँ पिता जी

एहसानमन्द हूँ पिता

कि पढ़ाया-लिखाया मुझे इतना

बना दिया किसी लायक कि जी सकूँ निर्भय इस संसार में

झोंका नहीं जीवन की आग में जबरन

बांधा नहीं किसी की रस्सी से कि उसके पास ताकत और पैसा था

लड़ने के लिए जाने दिया मुझको

घनघोर बारिश और तूफ़ान में


एहसानमन्द हूँ कि इन्तज़ार नहीं किया

मेरे जीतने और लौटने का

मसरूफ़ रहे अपने दूसरे कामों में

पिता की चिट्ठी

कभी इस ओर आओ तो
घर भी आना।

नज़दीक आ रहा
दादा का श्राद्ध
बहन की नहीं निभ रही ससुराल में
निपटाना है झगड़ा जमीन का
कभी इस ओर आओ तो
घर भी आना।


गाय ने दिया है बछड़ा
आम में आया है बूर
पहली बार फूला है
तुम्हारा रोपा अमलतास।

पीपल हो गया खोखला
पत्तियाँ हरी हैं

दादी की कम हुई यादाश्त
तुम्हारी याद बाकी है।

माँ देखती है रास्ते की ओर
काग उड़ाती है रोज़
कभी इस ओर आओ तो
घर भी आना।

दीवार में बढ़ गई है दरार
माँ का नहीं टूट रहा बुखार
दादा ने पकड़ ली है खाट
सभी जोह रहे तुम्हारी बाट
खत को समझना तार।

शेष सब सकुशल है
कभी इस ओर आओ तो
घर भी आना।

एक दिन की बात

उस दिन तू मुझको लगी थी
अतिमोहक, अभिरामा, अलबेली
बच्चों के संग झील में थी तू
कर रही थी जलकेली
मुझे तैरना नहीं आता था
इसलिए जल मुझे नहीं भाता था

मैं खड़ा किनारे गुन रहा था
तेरे शरीर की आभा
और मन ही मन बुन रहा था
एक नई कविता का धागा
तभी लगा अचानक मुझे
तू डूब रही है
मैं तेज़ी-से तुझ तक भागा

मन मेरा बेहद घबराया
दिखी नहीं जब तेरी छाया
तब कपड़ों में ही सीधे
मैं जल में कूद पड़ा था
तुझे बचाने की कोशिश में
ख़ुद मैं डूब रहा था

अब तू घबराई
पास मेरे आई
आकर मुझे बचाया
फिर मैं हँसता था, तू हँसती थी
तूने मुझे बताया--

"नहीं-नहीं मैं डूबी कहाँ थी
कर रही थी तुझसे अठखेली"
फिर शरमाई तू ऎसे मुझसे
जैसे वधू हो नई-नवेली

जाड़े की धुप

कई दिन तक घिरे
घने कुहासे के बाद
खिली धूप जाड़े की ।
देखकर
खिल उठा मन
जैसे
छठें वेतन आयोग के अनुसार
मिली हो तनख़्वाह की पहली किस्त ।
जैसे
साठ रुपये किलो से
बारह पर आ गया हो
प्याज का भाव ।
धूप से मैं
और धूप मुझसे
दोनों एक दूसरे से
लिपट गए
जैसे स्कूल से पढ़कर
लौटे नर्सरी के बच्चे को
लिपटा लेती है माँ ।
धूप सोहा रही थी
जैसे जली चमड़ी पर
बर्फ़ का टुकड़ा ।
धूप खिलने की ख़बर
आतंकी अफ़ज़ल कसाब की
गिरफ़्तारी के समाचार-सी
फैल गई
गाँव-गाँव, शहर-शहर ।
लोग बाँचने लगे
उलट-पुलट कर
एक-एक पृष्ठ.

हमारे भ्रष्ट राज नेता

The only place in India where food is cheap:
Tea- Rs. 1.00/-
Soup- Rs. 5.50/-
dal- Rs. 1.50/-
dosa- Rs. 4.00/-
......biryani- Rs. 8. 00/-
chicken- Rs. 24 .50/-
These items are meant for poor people & are available at
"Indian Parliment canteen"
The salary of those poor people is Rs.80,000/month without income tax...!!!
Copy this as ur status to show these ministers' poverty to every one...

हमारे भ्रस्त

The only place in India where food is cheap:
Tea- Rs. 1.00/-
Soup- Rs. 5.50/-
dal- Rs. 1.50/-
dosa- Rs. 4.00/-
......biryani- Rs. 8. 00/-
chicken- Rs. 24 .50/-
These items are meant for poor people & are available at
"Indian Parliment canteen"
The salary of those poor people is Rs.80,000/month without income tax...!!!
Copy this as ur status to show these ministers' poverty to every one...